साक्षात्कार: गव्यसिद्धाचार्य डॉ निरंजन भाई वर्मा

 प्रश्न: पंचगव्य चिकित्सा क्या है और इस से किस प्रकार के रोगों का उपचार संभव है?

डॉ निरंजन भाई वर्मा: पंचगव्य चिकित्सा देसी गाय मिलने वाले तीन गव्यों के आधार पर है; गोबर, मूत्र और दूध। दूध से छाछ और घी मिलता है तो कुल पांच गव्य हुए। हमारा शरीर भी पांच  तत्वों से बना है: भूमि, जल, वायु, अग्नि और आकाश । इन पांच तत्वों का अगर पंचगव्य से तुलनात्मक अध्यन करे तो पता चलता है की गाय का गोबर हमारे शरीर का भूमि तत्व है।  वायु तत्व जो है वो गाय का मूत्र है।  हमारे शरीर का अग्नि तत्व घृत है।  हमारे शरीर मई जो आकाश तत्व है उसका प्रतिनिधित्व करने वाला तत्व छाछ है। तो इस प्रकार हमारा शरीर जिन पांच चीजो से बना है अगर उनकी पूर्ति बराबर करते रहे तो कोई बीमारी नहीं होगी और गाय हमें वो पांचो देती है। इसी आधार पर हमारे शरीर में किसी भी तरह की बीमारी आ जाये या कमी आ जाये तो ये पांचो गव्य मिल कर उसको पूरा कर देते है। इस लिए शरीर में किसी तरह का असंतुलन हो जाये तो वो इन पांचो से ठीक होगा और वो पांचो ये गाय देती है।

 

प्रश्न: विभिन्न देसी गायो एवं जर्सी में किस प्रकार परख  या पहचान करे? ये भी बताऐं की किस गान का दूध कब लाभकारी है?

डॉ निरंजन भाई वर्मा: इस में कोई सूत्र बता दिया जाये ऐसा मुश्किल है। लेकिन गौपालकों की मदद से आप ये पहचान कर सकते है। कुछ पहचान है उसके आधार पर आप पकड़ कर सकते है लेकिन उसमे भी कभी कभी चूक हो जाती है। जैसे गाय का पुठ्ठा जो है वो एक पहचान है, गाय का गलकम्बल है, गाय की पीठ की आकृति है वो एक पहचान है और सबसे बड़ी पहचान व्यवहार है। हमारी देसी गाय का व्यवहार बिलकुल सांस्कृतिक, सभ्य और शालीन होता है। वो चारा भी खायेगी तो शालीनता से खायेगी। और इसका ठीक उल्टा जर्सी और होल्सटीन में होता है।

 

प्रश्न: पंचगव्य औषधि क्या बिना परामर्श के ली जा सकती है?

डॉ निरंजन भाई वर्मा: दूसरी चिकित्सा पद्दति जैसे आयुर्वेदा या एलोपैथी आदि के डॉक्टर्स अभी तक इसको लिखते या prescribe करते अाये है लेकिन आज इसका इतना विकास हुआ है की पंचगव्य एक complete और independent मेडिकल थेरैपी है। इसके एक्सपर्ट्स गव्यसिद्धों के नाम से जाने जाते है, जिनके पास इसकी पूरी तकनीक होती है की गौमूत्र कब संग्रह करना है, क्या भौगोलिक परिस्थितिया है और किस गाय से करना है आदि। तो ये बहुत लम्बा चोडा विज्ञान है जिसके आधार पर गौमूत्र का संग्रह होता है और फिर शास्त्रीय विधि से उसका औषधि में रूपांतरण है। ऐसी औषधि में सलाह दूंगा की परामर्श से ले ।  गौमूत्र अपनी इच्छा से लेते है तो किसी औषधि के साथ सप्प्लीमेंट्री के तोर पर ले।  गौमूत्र एक औषधि के रूप में केवल परामर्श से ले।

 

प्रश्न: आपने गव्यसिद्धो की बात करी, तो हमें बताइये की ये संस्था कौन से है जो गव्यसिद्धो को तैयार करती है और उनकी क्या प्रमाणता है?

डॉ निरंजन भाई वर्मा: ये पंचगव्य गुरुकुलम है जो अब विश्वविद्यालय बनने जा रहा है। यह तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित है। इस साल भारत के नौ राज्यों में हमने इसका विस्तार किया है और साल के अंत दिसंबर तक लगभग १७ राज्यों में इसके विस्तार करने की हमारी योजना है ताकि तेजी से गव्यसिद्ध डॉक्टर्स इस देश मे बड़ सके। इन गुरुकुलों में सभी भारतीय भाषाओँ में पढ़ाई करायी जाती है जो की भारतीय पार्लियामेंट्री बोर्ड से प्रमाणित है। विश्वविद्यालय बनने बाद इसमें क्या बदलाव आते है अभी नहीं कह सकते।