प्रदूषण रोकने की पहल; गोशालाओं में मिलेंगे गोबर के कंडे, शहर के चिन्हित स्थानों पर भी लगाए जाएंगे काउंटर जैसलमेर. होलिका दहन के लिए तैयार किए जा रहे है गोबर के कंडे। भास्कर संवाददाता | जैसलमेर आम तौर पर होली के दिन कई लोग होलिका में लकड़ियों के साथ साथ कई अन्य चीजें भी डाल देते हैं जिससे प्रदूषण फैलता है। लकडिय़ां भी अलग अलग तरह की होती है जिसका धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे में जैसलमेर में अनूठी पहल के तहत गोबर के कंडोंं से होलिका दहन का प्रयास किया जा रहा है और भास्कर ने भी इस मुहिम को जनता तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। गो गीता गायत्री सेवा समिति ने जैसलमेर की गोशालाओं के संचालकों के साथ मीटिंग कर इस बार होलिका में लकड़ियों की जगह गोबर के कंडों के इस्तेमाल पर जोर देने का आह्वान किया है। गोशाला संचालक भी तैयार हैं। अब बस जरूरत है तो शहरवासियों के इसके प्रति जागरूक होने की। गोशालाओं को मिलेगा संबल गौ गीता गायत्री सेवा समिति द्वारा शुरू की गई इस पहल का एक यह भी उद्देश्य है कि गाय के गोबर से बनने वाले कंडे गोशालाओं से लोगों को उपलब्ध हो जाएंगे। जिससे गोशालाओं को संबल मिलेगा और गायों के लिए चारे पानी की व्यवस्था करने में आसानी होगी। समिति के जेपी व्यास ने बताया कि यदि सभी लोग होलिका में कंडों का उपयोग करना शुरू कर दे तो गोशालाओं का कई महीनों का खर्च गाय के गोबर से ही उन्हें मिल जाएगा। कंडो के जलने से निकलने वाले धुएं से हवा का होगा शुद्धिकरण गो गीता गायत्री सेवा समिति द्वारा गोबर के कंडे बनवाएं जा रहे है। इस बार समिति द्वारा कंडो में हवन सामग्री भी डलवाई जा रही है। जिसका उद्देश्य पर्यावरण में प्रदूषण नहीं फैले। आमतौर पर जो होलिका दहन किया जाता है उसमें पर्यावरण प्रदूषण होता है। लेकिन गोबर के कंडों के साथ हवन सामग्री पर्यावरण के लिए भी रक्षक रहेगी। समिति की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है। शहर की जनता जागरूक होकर यदि कंडों का इस्तेमाल करेगी तो गोशालाओं को संबल मिलने के साथ साथ वातावरण भी शुद्ध होगा। इस बार कंडों में हवन सामग्री भी डलवाई जा रही है ताकि बिलकुल भी पर्यावरण प्रदूषण नहीं हो। जे.पी. व्यास, गौ गीता गायत्री सेवा समिति गोबर के कंडे जलने पर ऑक्सीजन निकलती है | गौरतलब है कि यज्ञ हवन में भी गोबर के कंडों का इस्तेमाल होता है। इसका उद्देश्य वातावरण के शुद्धिकरण से है। जानकारों के अनुसार कंडों के जलने पर निकलने वाला धुआं वातावरण को साफ कर ऑक्सीजन में बढ़ोतरी करता है जिससे शहर में फैले प्रदूषण का असर कम होता है। जबकि दूसरी तरफ आम तौर पर होलिका दहन में प्रदूषण बढ़ता है। कंडों की होली जलने पर वातावरण शुद्ध होगा। आम तौर पर प्रदूषण होता है वह नहीं होगा। हम तैयारी कर रहे हैं और हमारे पास कंडे तैयार भी हैं। मानव व्यास, तुलसी गौशाला मूलसागर source:https://www.bhaskar.com/rajasthan/jaisalmaer/news/RAJ-OTH-MAT-latest-jaisalmer-news-025002-1175266-NOR.html